Unkept Promises – Vaada Khilaafi

This is the first time I have tried to record another poet’s work in my voice. The beautiful words of Vaada Khilaafi have been penned by Rajveer Singh Prajapati.

Rajveer is a poet and writer of the novel ‘Destined Lives – Journey till the start’. He carries an equal amount of passion for Books and Royal Enfield Bullet. His friends call him Wikipedia due to his obsession with reading articles on it. Get to know more about Rajveer’s work at  http://rajveerspace.blogspot.in/.

Ahista Ahista – my recording

I have tried to record Amir Meenai’s ghazal Ahista Ahista, hope you like it.

सरकतिी जाए है रुख्ह से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता

निकलता आ रहा है आफताब आहिस्ता आहिस्ता

 

जावां होने लगे जब वो तो हम से कर लिया परदा

हया यकलख्ह्त आईइ और शबाब आहिस्ता आहिस्ता

 

शब-ए-फुर्कत का जागा हूँ फरिश्तों अब तो सोने दो

कभी फ़ुर्सत में कर लेना हिसाब आहिस्ता आहिस्ता

 

हमारे और तुम्हारे प्यार में बस फ़र्क है इतना

इधर तो जल्दी जल्दि है उधर आहिस्ता आहिस्ता

 

वो बेदर्दी से सर काटे “अमीर” और मैं कहु उन से

हुज़ूर आहिस्ता आहिस्ता, जनाब आहिस्ता आहिस्ता

Yeh Nayan Dare Dare

नयन तुम्हारे हम पर जादू कर देंगे
न पता था वोही इस तरह ठग लेंगे
हमने सोचा उन बाँध नयन मैं होगी हमारी शरण
पता न था बेघर कर जाएँगे हमें यूँही बेकारण

Ajab si Pagal Ladki Hai

अजब पागल सी लड़की है,
मुझे हर ख़त में लिखती है,
मुझे तुम याद करते हो?
तुम्हे मैं याद आती हूँ?
मेरी बातें सताती हैं,
मेरी नींदे जगाती हैं,
मेरी आँखे रुलाती हैं,

दिसंबर की सुनहरी धुप में अब भी टहलते हो?
किसी खामोश रस्ते से,
कोई आवाज़ आती है?
ठिठरती सर्द रातों में,
तुम अब भी छत पे जाते हो?
फलक के सब सितारों को,
मेरी बातें सुनाते हो?

किताबों से तुम्हारे इश्क में कोई कमी आई?
या मेरी याद के शिद्दत से आँखों में नमी आई?

अजब पागल सी लड़की है,
मुझे हर ख़त में लिखती है,

जवाबन उस को लिखता हूँ,

मेरी मसरुफिअत देखो,

सुबह से शाम ऑफिस में,
चिराग-ए-उम्र जलता है,
फिर उसके बाद दुनिया की,
कईं मज़बूरीयां पाओं में,
बेड़ी डाल रखती है,
मुझे बेफ़िक्र चाहत से,
भरे सपने नहीं दिखते,
टहलने, जागने, रोने की,
मोहलत ही नहीं मिलती,
सितारों से मिले अरसा हुआ,
नाराज़ हों शायद,
किताबों से शुगफ मेरा,
अभी वैसे ही कायम है,
फर्क इतना पड़ा है बस,
उन्हें अरसे में पढ़ता हूँ,

तुम्हे किसने कहा पगली,
तुम्हे मैं याद करता हूँ,

के मैं खुद को भुलाने की,
मुसलसल जुस्तजू में हूँ,
मगर ये जुस्तजू मेरी,
बहुत नाकाम रहती है,
मेरे दिन रात में अब भी,
तुम्हारी शाम रहती है,
मेरे लफ़्ज़ों की हर माला,
तुम्हारे नाम रहती है,
तुम्हे किसने कहा पगली,
तुम्हे मैं याद करता हूँ,

पुरानी बात है जो लोग अक्सर गुनगुनाते हैं,
उन्हें हम याद करते हैं जिन्हें हम भूल जाते हैं,

अजब पागल लड़की हो,
मेरी मसरुफिअत देखो,
तुम्हे दिल से भुलाऊ,
तो तुम्हारी याद आये ना,
तुम्हे दिल से भुलाने की,

मुझे फुरसत नहीं मिलती,

और इस मसरूफ जीवन में,
तुम्हारे ख़त का इक जुमला,
“तुम्हे मैं याद आती हूँ?”
मेरी चाहत की शिद्दत में,
कमी होने नहीं देता,
बहुत रातें जगाता है,
मुझे सोने नहीं देता,
सो अगली बार अपने ख़त में,
ये जुमला नहीं लिखना,

अजब पागल सी लड़की है,
मुझे फिर भी ये लिखती है,
मुझे तुम याद करते हो?
तुम्हे मैं याद आती हूँ?

I have tried reciting this beautiful Urdu nazm in my voice, hope you like it 🙂

कवि: अंजान
वीडियो: श्वेता दवे

Shishu Bodh

Shishu Bodh
Shishu Bodh

 

शिशु बोध

अनन्या के मुख का भाव बदला
माँ बनने का बोध दुनिया की सबसे बड़ी ख़ुशी थी उसने जान लिया

 

शिशु की किलकारी उसके कानों से न छूटती
बार बार अपने आमाशय पर हाथ फेरती

 

पता था कि अब तक जीव जागृत हुआ तक न होगा
पर हर बार फेरे हुए हाथ को चूमा

 

जीवन का मानो बदल गया उद्देश्य
अब कोई कमी न रही शेष

 

“अनन्या, हम इसे नहीं दे सकते जन्म।”
“क्यों नहीं ?” कहा उसे आँखें नम”

 

बस कह दिया। हर सवाल का जवाब होता नहीं। “
विशन मुख, सख्त आँखें, मौन कर वह चली

 

बयाँ करना चाहती थी वह पहली बार कि ख़ुशी
पर सुख की बरसात को दुःख का लबादा पहना कर छिप गयी

 

दवा पीने से पहले, वहीँ फेर फिर से हाथ
मेरी इच्छा मेरी नहीं, तू नहीं यहां किसीको स्वीकार

 

कहके पिया उसने गूंठ दवा  का
बस यही तक का साथ था उसके मातृत्व का
Image Source: Save Girl Child

Benam Rishtey (बेनाम रिश्ते)

Source: Google Image
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दिल टूटा धड़कने बिखरी
आँखें भीगी सिसकियाँ भारी

कापे हाथ ज़बान लड़खड़ाई
मन कमज़ोर पैर कपकपए


नज़ेरें मिली उससे
धृषय ढूँडलसा
पर कहीं ना कहीं हौसला देता सा


वो हसा दर्द से
वो भी मुस्कुराइ दुख च्छुपाए


कुछ रिश्तों के होते ना नाम
अशर्त, पवितरा पर बदनाम


इन रिश्तों का मोल करें क्या कोई
ना यह दुनिया के लिए ना दुनिया इनके लिए बनी

English Translation

 

Heartbroken beats scattered

Teary eyes, heaves and sobs

 

Trembling hands, tongue shudders

Emotions weak, legs quiver

 

Then the eyes meet

His form nebulous

Providing strength fathomless

 

He smiled pain within

She smiled too hurt hidden

 

Some relations are incognito

Unconditional, pious, undefined hitherto

 

Their value unfathomed

Neither the world nor they for each other made.

 

मौन ही मेरी चीख है !

दर्द से जी चीख उठा
वह लम्हा जब याद आया।तेरे शब्दों से बिखरी थी जब
कोई और किनारा न मिला तब।

उसी वक़्त आँखें मूंदी
सब्र की दीवार फिर से टूटी।

एक हाथ बढ़ा आश्रय देने
बुने रिश्तों के ताने बाने।

दिल ने ढूंढा फिर से सहारा
आँखें खोल देखा हाथ था तेरा।

असमंजस हुआ यह कैसा रिश्ता है!
जो दुःख दे वही  सहारा है!

स्वीकार किया यही है भाग्य मेरा
सुख भी तेरा दुःख भी तेरा।

मेरे सपने और मैं

 
 
अटखेलियां खेलता बहुत  ललचाता,
कभी मैं उसे छेड़ती कभी वो मुझे छेड़ता। 
 
दामन हाथ मैं आते ही फिसलता,
कभी आंसूं कभी हौसला देता।
 
कभी पास होता कभी पहुंच से बहार, 
यही रिश्ता है हमारा।

न मैं उसे छोड़ती न वो मुझे छोड़ता!