कही अनकही, बोल दुःखदायी, कहा सुनी बस वोही तोह हो
थका दिमाग, सुकूं की मंशा, गुरूर अब छोड़ भी दो
मैं भी तोह रूठी हूँ, मुझे भी मनाया करो।
वो घंटों प्यार कि बातें करना, प्यार के आगे कुछ न सोचना
शब्दों से बोल और बोल से शब्दों का बदलना, कभी वो भी तोह याद करो
मैं भी तोह रूठी हूँ, मुझे भी मनाया करो।
देर रात तोह कभी उजली सुबह ख़त लिखना, मिले खतों को कई बार पढ़ना
मेरे हर एहसास का अब मोल न आंको
मैं भी तोह रूठी हूँ, मुझे भी मनाया करो।
न खाने का होश, नींद भी है त्यागी, एक ही प्यास अब दिल मैं समायी
दरवाज़ा जो बंध कर रखा है वो तोह केवल खोल दो
मैं भी तोह रूठी हूँ, मुझे भी मनाया करो।
वो स्पर्श का अनुभव, वो आलिंगन कि मांग
मिलने का ख्वाब और हाथ थामने कि वजह तोह याद करो
मैं भी तोह रूठी हूँ, मुझे भी मनाया करो।कहते हो अक्सर, “प्रिये, बस तुम्हारा प्यार है जो बांधे रखा है हमे। ”
उन रिश्तों के धागों का कुछ तोह वास्ता रखो
मैं भी तोह रूठी हूँ, मुझे भी मनाया करो।
बिछड़ने के भय से मौका न दिया अपने आप को रूठने का अब तक
पर आज मन कह रहा है रूठने और रूठे रहने को
न मनाओ मुझे अब यह भी जाइज़ है, शायद मेरे प्यार कि यही आज़माइश है।